आइए जानते हैं कि यह नियम क्या हैं:
1 .वंशावली
यदि किसी व्यक्ति के नाम पर जमीन है, तो बंटवारे से पहले उसकी वंशावली तैयार करनी होती है। इसमें व्यक्ति के परिवार के सभी सदस्य – जैसे उसके पुत्र-पुत्रियां, पोते-पोतियां आदि – का नाम सिलसिलेवार तरीके से एक दस्तावेज पर दर्ज किया जाता है। यह वंशावली बंटवारे के लिए आवश्यक होती है ताकि सभी परिवारजन का नाम सही से दर्शाया जा सके।
2 .आधार कार्ड
बंटवारे में शामिल सभी हिस्सेदारों का आधार कार्ड होना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी हिस्सेदारों की पहचान सही है और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।
3 .लगान रसीद की छायाप्रति
जिस मौजा की जमीन है, उसी मौजा का राजस्व कर्मी लगान रसीद जारी करता है। इस रसीद के बिना बंटवारा प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। यह रसीद इस बात का प्रमाण होती है कि जमीन पर किसी प्रकार का कर्ज या बकाया नहीं है और वह सरकारी खजाने में निर्धारित मालगुजारी जमा की गई है।
4 .सभी हिस्सेदारों की सहमति
जमीन का बंटवारा तभी वैध माना जाएगा जब सभी हिस्सेदार (संबंधित परिवारजन) की सहमति प्राप्त होगी। बिना सहमति के बंटवारा प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर इस पर आवश्यक होंगे।
5 .भूमि से संबंधित दस्तावेज
जमीन का बंटवारा करने से पहले उस जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज़ों की जांच करना जरूरी है। इनमें केवाला और खतियान जैसे दस्तावेज शामिल होते हैं, जिनसे यह प्रमाणित होता है कि जमीन का स्वामित्व उस व्यक्ति के पास है। बिना इन दस्तावेजों के बंटवारा असंभव हो सकता है।
6 .जमाबंदी रैयत का मृत्यु प्रमाण-पत्र
अगर जमाबंदी रैयत (जमीन का मालिक) का निधन हो चुका है, तो उसकी मृत्यु प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होती है। यह प्रमाणपत्र यह दिखाता है कि जमीन के मालिक का निधन हो चुका है और अब उसके उत्तराधिकारी इस जमीन के बंटवारे का अधिकार रखते हैं।
7 .100 रुपए के स्टांप पर बंटवारा शेड्यूल
बिहार में बंटवारे की प्रक्रिया के लिए 100 रुपये का स्टांप पेपर अनिवार्य है। इस स्टांप पर बंटवारे का शेड्यूल (विवरण) दर्ज किया जाता है। यह शेड्यूल बंटवारे की वैधता को प्रमाणित करता है और इसे रजिस्ट्री कार्यालय के वेंडर से खरीदा जा सकता है।
8 .SDM कार्यालय से जारी शपथ-पत्र
बंटवारे से पहले सभी संबंधित पक्षों को SDM (Sub-Divisional Magistrate) कार्यालय से शपथ-पत्र लेना होगा। इसमें यह घोषित किया जाता है कि सभी हिस्सेदारों को अपने हिस्से की जमीन के बारे में जानकारी है और वे सहमत हैं। यह शपथ-पत्र बंटवारे की प्रक्रिया में कानूनी मान्यता प्रदान करता है।

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