मिली जानकारी के मुताबिक कुंभ मेला की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से ही चली आ रही हैं। ऐसा माना जाता हैं की समुद्र मंथन में जो अमृत कलश निकला था वो अमृत का कलश हरिद्वार, इलाहबाद, उज्जैन और नासिक के स्थानों पर ही गिरा था।
शास्त्रों के जानकार बताते हैं की तब से इन स्थानों पर कुंभ मेला का आयोजन किया जाता हैं। बता दें की हर 12 साल के बाद यह मेला अपने एक स्थान पर आयोजित होता हैं। ऐसी मान्यता है की स्वर्ग लोग में भी 144 वर्ष में एक बार कुंभ मेला का आयोजन किया जाता हैं।
वहीं शास्त्रों के मुताबिक पृथ्वी का एक वर्ष देवताओं का दिन होता है। उस वर्ष कुंभ मेला का आयोजन किया जाता हैं। इसलिए इस मेला को शुभ और पवित्र माना जाता हैं। इंसान को अपने जीवन काम में एक बार कुंभ में डुबकी जरूर लगानी चाहिए।

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