योजना के मुख्य लाभ:
1 .बिना गारंटी के लोन: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 3 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। यह लोन बिना किसी गारंटी के उपलब्ध होता है और इसका उपयोग कारीगर अपने व्यवसाय को बढ़ाने और सुधारने के लिए कर सकते हैं। इस लोन पर 5% की रियायती ब्याज दर लागू होती है, जिससे कारीगरों के लिए आर्थिक बोझ कम हो जाता है।
2 .प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट: इस योजना के तहत कारीगरों को मुफ्त में स्किल ट्रेनिंग दी जाती है। इससे उनके हुनर में सुधार होगा और वे अपनी कला को और निखार सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपेंड भी दिया जाता है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सकता है।
3 .टूल किट और डिजिटल ट्रांजैक्शन में सहायता: इस योजना में कारीगरों को टूल किट की सहायता भी प्रदान की जाती है, जो उनके काम को सुगम बनाएगी। इसके साथ ही, डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए उन्हें इनाम भी दिया जाता है, जिससे वे अपनी आय के स्रोत को और बेहतर बना सकें।
योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ उन कारीगरों और शिल्पकारों को मिल सकता है जो पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। योजना में 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोग आवेदन कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: बढ़ई (लकड़ी का काम करने वाले), नाव बनाने वाले, लोहार (धातु से सामान बनाने वाले), ताला बनाने वाले, सुनार (सोने-चांदी का काम करने वाले), मूर्तिकार, राजमिस्त्री, मछली पकड़ने वाले, धोबी (कपड़े धोने वाले), दर्ज़ी (कपड़े सिलने वाले), नाई, खिलौना बनाने वाले, कुम्हार (मिट्टी से बर्तन बनाने वाले), जूता बनाने वाले, टोकरी, चटाई या झाड़ू बनाने वाले
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत लोन दो चरणों में दिया जाता है:
पहला चरण: इसमें 1 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जो 18 महीने की अवधि में चुकता करना होता है।
दूसरा चरण: इसमें 2 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, और इसकी अवधि 30 महीने होती है। इस लोन का उद्देश्य कारीगरों को अपने पारंपरिक व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

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