बांग्लादेश का संघर्ष और भारत की भूमिका
बांग्लादेश का संघर्ष भारत से बहुत पहले शुरू हो चुका था। 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान में पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बांग्लादेश है) और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सांस्कृतिक भेदभाव की खाई गहरी होती गई। पूर्वी पाकिस्तान के लोग हमेशा महसूस करते थे कि उनके साथ पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार भेदभाव कर रही है। यह स्थिति 1971 में और भी ज्यादा बिगड़ गई, जब पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में विद्रोहियों के खिलाफ अत्याचार करना शुरू किया।
25 मार्च 1971 को पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह जनरल याहिया खान ने पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के विद्रोह को कुचलने के लिए सेना भेज दी। इस सैन्य कार्रवाई में लाखों निर्दोष नागरिकों की जान गई, और यह अत्याचार पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। बांग्लादेश के लोगों के इस संघर्ष को देखते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक और सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया।
भारत-पाकिस्तान युद्ध की शुरुआत
बांग्लादेश के संघर्ष में भारत ने न केवल समर्थन किया, बल्कि एक सीमा से अधिक भारत के लिए यह संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बन गया। जब पाकिस्तान ने 3 दिसंबर 1971 को भारतीय सीमा में हवाई हमले किए, तो भारत ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सैनिक ठिकानों पर जोरदार हमला किया। साथ ही भारतीय सेना ने बांग्लादेश में प्रवेश करके पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
भारतीय सेना की त्वरित और निर्णायक कार्रवाई ने पाकिस्तान को कमजोर कर दिया। 14 दिसंबर 1971 को भारतीय एयरफोर्स के मिग-21 विमानों ने ढाका में स्थित गवर्नमेंट हाउस पर हमला किया, जहां पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल ए.ए.के. नियाजी मौजूद थे। इस हमले से पाकिस्तानी सेना को एक बड़ा झटका लगा, और उनकी हार तय हो गई।
16 दिसंबर 1971: आत्मसमर्पण का दिन
16 दिसंबर 1971 की शाम भारतीय सेना और बांग्लादेशी मुक्ति सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई ने ढाका में पाकिस्तानी सेना को पूरी तरह से घेर लिया। जनरल नियाजी, जिनके पास 93,000 सैनिकों की सेना थी, ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस ऐतिहासिक क्षण को भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा और पाकिस्तानी जनरल नियाजी ने ढाका में हस्ताक्षर करके दर्ज किया।
भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया और उन्होंने घोषणा की कि "ढाका अब एक स्वतंत्र देश की स्वतंत्र राजधानी है।" बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम को भारत ने अपनी सैन्य शक्ति और कूटनीति के माध्यम से एक नई दिशा दी थी।
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