न्यूज डेस्क: भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा हैं। इसी बीच एक अच्छी खबर आई हैं की भारतीय वैज्ञानिक कोरोना वायरस की दवा बनाने के करीब पहुंच गए हैं। अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में कोरोना वायरस के स्वरूप पर नज़र रख रहे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में पाए गए कोरोना वायरस काफ़ी हद तक एक समान हैं. ये कई देशों में रहने वाले लोगों के माध्यम से भारत पहुंचे हैं. सामान्य रूप से वायरस एक से दूसरे मानव शरीर के भीतर गुजरते समय अपनी संरचना बदलता रहता है, जिसे म्यूटेशन कहते हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना वायरस में म्यूटेशन की यह प्रक्रिया नहीं देखी जा रही है. पिछले हफ्ते आईसीएमआर के वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने बताया था कि भारत में मिले कोरोना के वायरस की जेनेटिक संरचना 99.9 फ़ीसदी वुहान शहर में मिले वायरस के समान थी. साथ ही उन्होंने वायरस के म्यूटेशन से उसकी जेनेटिक संरचना बदलने की आशंका भी जताई थी.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, ''ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ भारत में ही कोरोना वायरस की जेनेटिक संरचना एक समान मिल रही है. पूरी दुनिया में यह वायरस काफ़ी हद तक एक समान ही पाया जा रहा है. इस कारण यह माना जा रहा है कि कोरोना वायरस में इंफ्लुएंजा जैसे दूसरे वायरस की तरह तेज़ी से जेनेटिक संचरना बदलने के गुण नहीं हैं. इस कारण यदि इस वायरस को रोकने के लिए कोई वैक्सीन बनती है या फिर इससे प्रभावित मरीज़ों के लिए कोई कारगर दवा ईजाद की जाती है तो वह लंबे समय तक कारगर रहेगी.''
आइसीएमआर के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वायरस के बारे में निश्चित रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. अख़बार लिखता है कि लंबे समय तक कोरोना वायरस पर नज़र रखने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.

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