इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से मिली अनुमति ने कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वहीं, सड़क निर्माण के इस हिस्से में कैमूर के एक छोटे से क्षेत्र में वन भूमि भी शामिल है, जो परियोजना की राह में एक बड़ी बाधा थी।
परियोजना के लिए आवश्यक वन भूमि के अधिग्रहण के लिए, बिहार सरकार ने कैमूर जिले के खैती गांव में नया वन क्षेत्र बनाने के लिए जमीन चिह्नित कर ली है। यह कदम वन्यजीवों और वन संपदा के संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इस नई भूमि के तहत वनक्षेत्र की स्थापना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति भी मिल चुकी है, जिससे परियोजना का मार्ग अब साफ हो गया है।
इस परियोजना के पूरा होने से बनारस और कोलकाता के बीच यात्रा में न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगा। एक्सप्रेसवे का निर्माण दोनों राज्यों के बीच व्यापार, पर्यटन और परिवहन की गति को तेज करेगा। साथ ही, इससे क्षेत्रीय संपर्क सशक्त होगा और सामाजिक-आर्थिक विकास में भी सुधार आएगा।

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