अलग-अलग जोनों में थी नियमों की अलग व्याख्या
रेलवे बोर्ड के संज्ञान में आया था कि देश के कई रेलवे जोनों में पुरस्कार के लिए पात्रता तय करने के दौरान नियमों की अलग-अलग तरीके से व्याख्या की जा रही थी। कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था, वाणिज्यिक कार्यों या अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों में हुई मामूली चूक के कारण कर्मचारियों का दुर्घटना रहित सेवा पुरस्कार रोक दिया जाता था।
किन मामलों में नहीं मिलेगा पुरस्कार?
रेलवे बोर्ड ने नए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी पर मेजर पेनल्टी यानी गंभीर विभागीय कार्रवाई हुई है, तो वह दुर्घटना रहित सेवा पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होगा। इसके अलावा यदि किसी कर्मचारी को सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, रेल दुर्घटना से जुड़े मामले या संरक्षा संबंधी गंभीर लापरवाही के कारण दंड मिला है, तो ऐसे मामलों को भी पात्रता तय करते समय ध्यान में रखा जाएगा।
गैर-सुरक्षा मामलों में मिली राहत
बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि सफाई व्यवस्था, कमर्शियल ड्यूटी, वेंडर प्रबंधन या अन्य गैर-सुरक्षा प्रशासनिक कार्यों में हुई छोटी त्रुटियों के कारण दी गई माइनर पेनल्टी को अब पुरस्कार की पात्रता तय करते समय आधार नहीं बनाया जाएगा। यानी केवल ऐसी मामूली कार्रवाई के कारण कर्मचारी का पुरस्कार नहीं रोका जाएगा।
पूरे देश में लागू होंगे एक जैसे नियम
रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी जोनल रेलवे और संबंधित अधिकारियों को नए दिशा-निर्देशों के अनुसार ही पुरस्कार के प्रस्तावों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इससे हर जोन में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित होगा।

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