ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गांव में सरकार को चलाने के लिए एक परामर्शी समिति बनाया गया हैं। जो समिति चुनाव ना होने की स्थिति में नए सरकार का गठन कर सकती हैं और पंचायती राज व्यवस्था द्वारा चल रहे काम कार्य को आगे बढ़ा सकती हैं।
बता दें की बिहार में 16 जून से नई व्यवस्था को लागू किया जायेगा। इस व्यवस्था के अनुसार पंचायत के मुखिया समिति के अध्यक्ष रहेंगे। जबकि सरकारी सेवक सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे। वहीं विघटित जिला परिषद के अध्यक्ष ही परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे।
बता दें की परामर्शी समिति में सरकार के अधिकारी काम कार्य की जिम्मेदारी संभालेंगे। लेकिन इन्हे नई योजना लाने या बनाने का अधिकार नहीं होगा। ये सिर्फ पहले से चली आ रही योजना को चलाने का काम करेंगे ताकि चुनाव ना होने की स्थिति में काम कार्य प्रभावित ना हो।

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