आपको बता दें की साल 2005 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने सबसे पहले इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का दांव खेला था। उसके बाद मायावती और अखलेश यादव ने भी इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का दांव खेला था जो विफल हो गया।
वहीं साल 2019 में योगी सरकार ने भी इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का अधिसूचना जारी किया था। लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के इस अधिसूचना को भी रद्द कर दिया हैं। ऐसे में ऐसा माना जा रहा हैं की केंद्र सरकार 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ये बड़ा दांव खेल सकती हैं।
जानकार बताते हैं की किसी भी जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं होता हैं। हालांकि केंद्र सरकार संसद में इसके लिए प्रस्ताव ला सकती हैं और संसद की मंजूरी के बाद इसपर मुहर लग सकती हैं।
उत्तर प्रदेश में 17 जातियों को मिल सकता आरक्षण, देखें लिस्ट?
मल्लाह, निषाद, कुम्हार,कहार, कश्यप, केवट,बिंद, भर, राजभर, प्रजापति, धीवर, धीमान, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मछुआ।

0 comments:
Post a Comment