शरीर में 'वीर्य' कैसे बनते हैं, जानकार चौक जाएंगे!
1. प्रारंभिक चरण: वीर्य का निर्माण अंडकोष के भीतर स्थित सेमिनल ट्यूब्यूल्स (seminiferous tubules) में होता है। यहाँ पर स्पर्म कोशिकाएं (sperm cells) बनती हैं। अंडकोष में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण भी होता है, जो वीर्य के निर्माण के लिए आवश्यक है।
2. स्पर्मेटोजेनेसिस: यह प्रक्रिया 3 मुख्य चरणों में होती है।
स्पर्मैटोगोनिया (Spermatogonia): यह सबसे प्रारंभिक अवस्था होती है, जिसमें कोशिकाएं डिवाइड होती हैं और स्पर्मैटोसाइट्स (spermatocytes) में बदल जाती हैं।
स्पर्मैटोसाइट्स का विभाजन: प्राइमरी स्पर्मैटोसाइट्स दो बार विभाजित होते हैं। पहली बार में वे सेकेंडरी स्पर्मैटोसाइट्स में बदलते हैं, और दूसरी बार में ये स्पर्मेटिड्स (spermatids) में परिवर्तित होते हैं।
स्पर्मेटिड्स फिर परिपक्व होकर स्पर्म (sperm) बनते हैं। इसका निर्माण हमारे खान-पान और स्वास्थ्य जीवनशैली पर निर्भर करता हैं।
3. स्पर्म की परिपक्वता: स्पर्मेटिड्स के रूपांतरण से स्पर्म की परिपक्वता का चरण शुरू होता है। इस प्रक्रिया को स्पर्मेटोजेनेसिस कहते हैं, और इसमें कोशिका के आकार में बदलाव, हेड (जिसमें DNA होता है), मिडपीस (जिसमें माइटोकॉन्ड्रिया होता है) और टेल (जो गति में मदद करता है) का निर्माण होता है।
4. वीर्य का निर्माण और संचयन: जब स्पर्म पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं, तो वे अंडकोष के अंदर स्थित एपिडिडाइमिस (epididymis) में एकत्रित होते हैं, जहां वे और भी परिपक्व होते हैं। यहाँ वे 2-3 सप्ताह तक रहते हैं और उनके अंदर गतिशीलता और जीवंतता आती है।
5. वीर्य का उत्सर्जन: जब वीर्य का स्खलन होता है, तो स्पर्म को अंडकोष से वेसिल डिफरन्स (vas deferens) के जरिए मूत्रमार्ग (urethra) तक भेजा जाता है। यहाँ से अन्य रसायन जैसे कि सेमिनल प्लाज्मा (seminal plasma), प्रोस्टेट स्राव (prostate secretion), और कूपर ग्रंथियों का स्राव (bulbourethral glands secretion) भी मिलते हैं, जिससे वीर्य का तरल रूप बनता है।

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