5 जिलों में नीलामी प्रक्रिया धीमी
खान एवं भू-तत्व विभाग की समीक्षा में यह सामने आया है कि पूर्णिया, वैशाली, सारण, गोपालगंज और सुपौल ऐसे जिले हैं जहाँ बालू घाटों का बंदोबस्त काफी धीमी गति से चल रहा है। इन जिलों में भारी संख्या में घाट अब तक नीलाम नहीं हो पाए हैं, जिससे निर्माण कार्यों में भी रुकावटें आ रही थीं।
अवैध खनन पर लगाम की जरूरत
जहाँ भी सरकारी स्तर पर घाटों का प्रबंधन नहीं हो पाता, वहाँ बालू माफिया सक्रिय हो जाते हैं। ये माफिया नदियों से बिना किसी नियंत्रण के बड़ी मात्रा में बालू का अवैध खनन करते हैं। इससे एक ओर पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, वहीं दूसरी ओर सरकार को राजस्व की भारी हानि होती है। विभाग का मानना है कि घाटों की समय पर नीलामी न होने के कारण ऐसी स्थिति और बढ़ जाती है।
15 दिनों के भीतर निविदा निकालने का निर्देश
समीक्षा बैठक के बाद विभाग के सचिव ने संबंधित जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि घाटों का बंदोबस्त अब प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। जिन घाटों की नीलामी नहीं हुई है, उनकी 15 दिनों के अंदर निविदा प्रकाशित कर नीलामी प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया है।
पर्यावरण स्वीकृति वाले घाटों को प्राथमिकता
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिल चुकी है, उनकी नीलामी सबसे पहले की जाए। इससे न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि उन क्षेत्रों में निर्माण कार्य भी निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे।
घाटों की सघन और नियमित मॉनिटरिंग पर जोर
जब तक नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित जिलों को घाटों की सघन और नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अवैध खनन की कोई गतिविधि जारी न रह सके।
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