न्यूज डेस्क: बिहार में नौकरी करने वाले सरकारी कर्मचारियों का हाल बेहाल रहता हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण समय पर वेतन का भुकतान होना नहीं हैं। बिहार के सीएम नीतीश कुमार राज्य में स्थिति सुधारने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन हालात ये है की बिहार के सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन ही नहीं मिलता हैं।
एक रिपोट की मानें तो बिहार के लगभग 80 फीसदी से ज्यादा सरकारी कर्मचारी ऐसे हैं। जिन्हे समय पर वेतन नहीं मिलता हैं। आपको बता दें की वर्तमान में कोरोना महामारी के बीच 1222 आईटीआई अतिथि अनुदेशकों को वेतन न मिलने के कारण वे भुखमरी के कगार पर हैं। इनके घरों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं। ये लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
आपको बता दें की कैटेगरी A (व्याख्यता) में आने वालों आईटीआई अतिथि अनुदेशकों को 1200 रुपये प्रति घंटा की दर से अधिकतम 21 हजार रुपये प्रति माह का वेतन मिलता है। वहीं कैटेगरी- बी (तकनीकी कर्मी) में आने वाले अतिथि अनुदेशकों को 400 रुपये प्रति घंटा की दर से अधिकतम 18 हजार रुपये प्रति माह का वेतन मिलता है। लेकिन छह महीने से इन्हे वेतन नहीं मिल पाया है। बिहार के सभी विभाग में कोरोना महामारी से पहले भी इस तरह के हालात रहते हैं।

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