यूपी में OBC और EWS को कितना आरक्षण, जानें!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (यूपी) में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) और EWS (आर्थ‍िक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट के बीच कुछ मुख्य अंतर होते हैं। ये दोनों सर्टिफिकेट विभिन्न सामाजिक और आर्थ‍िक स्थिति को दर्शाते हैं, और इनका उपयोग सरकारी सेवाओं, शिक्षण संस्थानों, और अन्य योजनाओं में आरक्षण के लिए किया जाता है।

OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) सर्टिफिकेट:

1 .यह सर्टिफिकेट उन लोगों के लिए जारी किया जाता है जो सामान्य जाति से नहीं होते, लेकिन वे पिछड़ी जातियों से संबंधित होते हैं।

2 .OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भारतीय संविधान के तहत विभिन्न सरकारी योजनाओं और नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान है। भारतीय सरकार ने OBC को 27% आरक्षण दिया हैं।

3 .OBC में कुछ उपश्रेणियाँ भी होती हैं, जैसे कि "OBC (NCL)" (Non-Creamy Layer) जो आर्थिक स्थिति के आधार पर होता है, और "OBC (Creamy Layer)" जो उच्च आर्थिक स्थिति वाले OBC वर्ग के होते हैं।

4 .केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में OBC उम्मीदवारों के लिए 27% आरक्षण है। इसमें सरकारी विभागों, सरकारी निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, आदि में पदों पर नियुक्ति के लिए आरक्षण मिलता है।

EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट:

1 .यह सर्टिफिकेट उन लोगों के लिए होता है जो सामान्य जाति (General Category) के होते हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।

2 .EWS सर्टिफिकेट जाति या समुदाय से नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के परिवार की आय, संपत्ति, और जीवनस्तर पर आधारित होता है।

3 .EWS सर्टिफिकेट का उद्देश्य उन व्यक्तियों को आरक्षण प्रदान करना है जो आर्थिक रूप से पिछड़े हुए होते हैं, चाहे उनकी जाति कुछ भी हो।

4 .EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) को 10% आरक्षण मिलता है। यह आरक्षण 2019 में भारत सरकार द्वारा संविधान में 103वें संशोधन के तहत लागू किया गया था।

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