बिहार में दादा की संपत्ति पर तीन लोगों का अधिकार, जानें कानून
1 .बिहार में कानून के अनुसार दादाजी की स्व-प्राप्त संपत्ति पर किसी व्यक्ति का कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता है। लेकिन दादाजी के मौत के बाद इसपर पहला अधिकार उनकी पत्नी का होता हैं।
2 .दादाजी के मौत के बाद उनकी पत्नी यानि कि दादी चाहें तो इस संपत्ति को अपने बेटे बेटियों को बांट सकते हैं या उन्हें इसमें हिस्सा दे सकते हैं।
3 .बिहार में अगर दादाजी के पास कोई पुश्तैनी जमीन हैं तो इसपर उनके बेटे-बेटियों का सम्मान अधिकार होता हैं। यह अधिकार उन्हें जन्म से प्राप्त होता हैं।
4 .बता दें की दादाजी के मौत के बाद हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत हमवारिस के तौर पर पोता भी उनकी संपत्ति पर दावा कर सकता हैं।
5 .अगर दादाजी ने खुद की कमाई से कोई मकान या बंगला बनाया हैं तो उसपर कोई भी व्यक्ति चाहें उनका बेटा ही क्यों ना हो वो इसपर दावा नहीं कर सकता हैं।

0 comments:
Post a Comment