मिली जानकारी के अनुसार वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन में एक वक्त ऐसा था जहां वह स्पेस एजेंसी नासा में काम करते थे वहीं एक वक्त ऐसा भी आया जहां उनके कई साल गुमनामी में अपनी जिंदगी बिताई। उन्होंने अपने देश के लिए नासा की नौकरी छोड़ दी थी।
कहते हैं की वशिष्ठ नारायण सिंह ने नासा की नौकरी छोड़कर भारत आ गए और वो आईआईटी कानपूर में पढ़ाना शुरू किया। लेकिन उनकी जिंदगी भारत आने के बाद बिल्कुल बदल गई और वो एक बड़ी बीमारी से ग्रसित हो गए तथा वो एक गुमनाम व्यक्ति की तरह जिंदगी बिताने लगें।
बता दें की गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी। उनके बारे में कहा जाता है की नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही था। इससे नासा के सभी वैज्ञानिक हैरान हो गए थे।
वशिष्ठ नारायण सिंह ने बिहार बोर्ड के सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की थी और पटना साइंस कॉलेज से स्नातक किया था। इसके बाद वो अमेरिका चले गए और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। वो बिहार के लोगों के लिए आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं।

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