करीब 500 करोड़ रुपये की लगात से सरकार राज्य के अलग-अलग जिलों में जाति आधारिक जनगणना कराएगी। साल 2023 तक जाति आधारिक जनगणना का काम पूरा कर लिया जायेगा। इसको लेकर तैयारी भी शुरू कर दी गई हैं।
बिहार में जाति आधारित जनगणना से होंगे 7 बड़े फायदे?
1 .बिहार में जाति आधारित जनगणना से लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी सरकार को होगी।
2 .जाति गणना कराने से सरकार को विभिन्न जातियों की स्थिति के बारे में ठीक ठाक आंकड़ा उपलब्ध हो सकेगा।
3 .जनगणना के बाद विभिन्न जातियों को समुचित विकास के लिए योजना तैयार कर उसके क्रियान्वयन में सुविधा मिल सकेगी।
4 .जिस जाति की आर्थिक स्थिति खराब होगी, सरकार उन जातियों के लोगों को समाज में आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करेगी।
5 .जाति आधारित गणना की प्रगति से समय-समय पर विधानसभा के विभिन्न दलों के नेताओं को जानकारी दिए जाने की व्यवस्था होगी।
6 .बता दें की सरकार समय-समय पर मीडिया को जाति आधारित गणना के बारे में की जा रही कार्रवाई की जानकारी देगी।
7 .जाति आधारिक जनगणना से सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति के पास पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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