खबर के अनुसार गुरूवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में जाति आधारित गणना कराने का प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव पर कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी हैं। इससे राज्य में जातीय जनगणना कराने का रास्ता साफ हो गया हैं।
बता दें की बिहार में जातीय जनगणना में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगें। आठ महीने में यह जनगणना पूरा कर लिया जायेगा। सचिव आमिर सुबहानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए कहा है की सरकार के स्तर पर जाति आधारित गणना कराने की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग की होगी।
वहीं जिला स्तर पर जिलाधिकारी इसके नोडल पदाधिकारी होंगे। जाती आधारित इस जनगणना में सामान्य प्रशासन विभाग, जिलाधिकारी ग्राम, पंचायत एवं उच्चतर स्तरों पर विभिन्न विभागों के अधीनस्थ कार्य करने वाले कर्मियों की सेवाएं ली जाएगी।

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