बता दें की बिहार सरकार ने सरकारी जमीन की खरीद बिक्री को रोकने के लिए कई तरह के नियम कानून बनाये हैं। साथ ही साथ जमीन सर्वे के दौरान अधिकारियों को सरकारी जमीन चिन्हित करने को भी कहा है ताकि भविष्य में इसका इस्तेमाल सरकारी कामों के लिए किया जा सके।
खबर के अनुसार बिहार में कई ऐसे लोग हैं जो सरकारी तलाब, गैरमजरुआ जमीन, स्कूल-कॉलेज और अस्पताल की जमीन पर कब्जा जमाये बैठे हैं। सरकार इन सभी लोगों को अवैध मानते हुए इसे हटाने का अभियान चला रही हैं। कई जिलों में ऐसी जमीन को अवैध कब्जा से मुक्ति किया गया हैं।
बिहार के पटना, भागलपुर, पूर्णिया समेत 38 जिलों में ये जमीन है सरकारी?
बकाश्त की जमीन : वैसी जमीन जो जमींदारी उन्मूलन के पूर्व जमींदारों ने अपने पास जो जोत की जमीन रखी, वो जमीन सरकरी मानी जाती हैं।
गैर मजरुआ मालिक : वैसी जमीन को गैस मजरुआ हैं वो सरकारी जमीन कहलाती हैं। इस जमीन पर अधिकार सरकार का होता हैं।
गैर मजरुआ आम: इस जमीन का उपयोग सार्वजनिक काम के लिए किया जाता हैं। इस जमीन पर अधिकार भी सरकार की होती हैं।
केसरे हिन्द: यह जमीन राज्य सरकार और भारत सरकार की जमीन होती हैं। इस जमीन को खरीदना और बेचना गैर क़ानूनी हैं।
खास महाल: यह जमीन पर सरकार के अधिकार में आती हैं। इस जमीन की बिक्री नहीं हो सकती। यह लीज पर दी जाती है।

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