यूपी में पुश्तैनी जमीन-जायदाद के बंटवारे के 5 नियम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे के लिए नए नियम बनाये गए हैं। इन नए नियम के जरिए उत्तर प्रदेश में पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा करना अब पहले से अधिक संरचित और कानूनी होगा। जिससे परिवारों को विवादों से बचने में मदद मिलेगी और बंटवारे की प्रक्रिया सरल होगी।

यूपी में पुश्तैनी जमीन-जायदाद के बंटवारे के 5 नियम। 

स्टाम्प शुल्क: 

उत्तर प्रदेश में अब पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे के लिए 5,000 रुपये का स्टाम्प शुल्क देना होगा। इसके अलावा, बंटवारा पत्र (पार्टीशन डीड) और समझौता पत्र (सेटलमेंट डीड) पर स्टाम्प शुल्क नहीं देना होगा, जो परिवारों को कुछ राहत प्रदान करता है।

रजिस्ट्रार के पास आवेदन:

संपत्ति के बंटवारे के लिए जिले के रजिस्ट्रार के पास आवेदन करना होता है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जो संपत्ति के वैध बंटवारे के लिए जरूरी है।

संपत्ति के हिस्सेदारों के नाम:

बंटवारे की प्रक्रिया में, संपत्ति के सभी हिस्सेदारों के नाम को दर्ज करना आवश्यक है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि सभी परिवार के सदस्य बंटवारे में शामिल हैं और उनकी सहमति ली गई है।

सहमति पत्र हैं जरूरी:

आवेदन के बाद, तहसीलदार के सामने सहमति पत्र देना होता है। इस सहमति पत्र में सभी हिस्सेदारों की सहमति होनी चाहिए, ताकि यह साबित हो सके कि बंटवारा आपसी सहमति से किया जा रहा है।

तहसील का प्रमाणपत्र:

बंटवारे की प्रक्रिया में छूट का लाभ लेने के लिए, परिवार रजिस्टर की कॉपी या तहसील का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। यह दस्तावेज परिवार की पहचान और संपत्ति के बंटवारे के अधिकारों की पुष्टि करता है।

दावों की प्रामाणिकता जांचना:

सभी दावों की प्रामाणिकता जांचने के बाद, तहसीलदार से सेटलमेंट डीड की अनुमति मिलती है। यह अनुमति बंटवारे की वैधता को सुनिश्चित करती है।

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