बता दें की इस योजना का उद्देश्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ स्वचालित तरीके से चालान जारी करना है, ताकि ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाया जा सके। इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने से राज्य सरकार को यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करने में सहायता मिलेगी, साथ ही चालान प्रक्रिया भी पारदर्शी और तेज़ होगी।
एएनपीआर कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर उसका डेटा रिकॉर्ड कर सकते हैं और ट्रैफिक उल्लंघन होने पर स्वचालित रूप से चालान जारी कर सकते हैं। राज्य सरकार ने इस परियोजना के तहत कैमरों की स्थापना और उनके रखरखाव के लिए कुल 35 करोड़ 46 लाख 37 हजार रुपए की स्वीकृति दी है। इससे न केवल ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि सड़क पर दुर्घटनाओं की संख्या को भी घटाया जा सकेगा।
इस पहल का लक्ष्य शहरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्याओं को हल करना और स्मार्ट शहरों के निर्माण की दिशा में एक कदम और बढ़ना है। ऑटोमैटिक चालान व्यवस्था से बिहार के नागरिकों को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था प्राप्त होगी, और यह राज्य के लिए डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
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