पहले की पॉलिसी में, बच्चों को आठवीं कक्षा तक बिना परीक्षा के प्रमोट किया जाता था, भले ही उनका प्रदर्शन अच्छा न हो। नई व्यवस्था के तहत अब अगर छात्र वार्षिक परीक्षा में फेल होते हैं, तो उन्हें दो महीने के अंदर फिर से परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
नई प्रणाली के तहत, परीक्षा में फेल हुए विद्यार्थियों को फिर से अपनी सक्षमता के आधार पर परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा। इस प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए, स्कूलों को बच्चों के प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए नियमित तौर पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी और फेल होने वाले बच्चों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित करनी होगी।
यह प्रणाली बच्चों के शैक्षिक प्रदर्शन को सुधारने और उनके विकास को सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि उन्हें कक्षा से बाहर न किया जाए, बल्कि सुधारने का एक और मौका दिया जाए। यह कदम शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार लिया गया है, और इसे लागू करने के लिए स्कूलों में तैयारी शुरू हो चुकी है।
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