भारत और चीन की परमाणु नीति, पढ़ें एक रिपोर्ट

न्यूज डेस्क: भारत और चीन, दोनों एशिया के प्रमुख शक्तिशाली देशों में शामिल हैं और दोनों के पास परमाणु हथियारों का भंडार है। इन देशों की परमाणु ताकत को समझने के लिए न केवल उनकी परमाणु हथियारों की संख्या, बल्कि उनकी परमाणु नीति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

भारत की परमाणु ताकत

स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सिपरी (SIPRI) के रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास अनुमानित 172 परमाणु वारहेड्स हैं। यह संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। भारत की परमाणु ताकत मुख्य रूप से उसके भूमि, जल और वायु प्रणालियों द्वारा समर्थित है।

भारत की परमाणु नीति:

भारत की परमाणु नीति "No First Use" (NFU) पर आधारित है, जो इसका स्पष्ट संकेत देती है कि भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि कोई अन्य देश भारत पर परमाणु हमला करता है, तो भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ जवाब देगा। भारत ने हमेशा अपनी परमाणु नीति को शांतिपूर्ण उद्देश्य के रूप में प्रस्तुत किया है और इसे अपने सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए अपनाया है।

चीन की परमाणु ताकत

चीन के पास अनुमानित 500 परमाणु वारहेड्स हैं, जो भारत की तुलना में कहीं अधिक हैं। चीन ने लगातार अपनी परमाणु ताकत को बढ़ाया है और पिछले कुछ वर्षों में उसने अपनी परमाणु मिसाइलों की संख्या और क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

चीन की परमाणु नीति:

चीन की परमाणु नीति में No First Use (NFU) का सिद्धांत शामिल है, जो यह बताता है कि चीन पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। चीन अपनी परमाणु नीति को एक "संयमित और जिम्मेदार" दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें परमाणु हथियारों का उपयोग केवल "स्थायी परमाणु युद्ध" की स्थिति में किया जाएगा। 

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