भारत का तेजी से बढ़ता ग्राफ
भारत ने बड़े आर्थिक लक्ष्यों को अपने सामने रखा है और इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वह पूरी ताकत से दौड़ लगा रहा है। तमाम अनुमानों के अनुसार, भारत अगले कुछ वर्षों में बड़ी आर्थिक ताकत बनने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने 2025-26 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और वह अगले तीन वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
वहीं, 2030 तक यह 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। भारत की औसत विकास दर पिछले दस वर्षों में 7.4 प्रतिशत रही है, जो इस बात का संकेत है कि यह देश सही दिशा में बढ़ रहा है। भारत के पास न केवल बड़ी कामकाजी आबादी है, बल्कि वह तेजी से डिजिटल इकनॉमी की ओर बढ़ रहा है। भारत में निर्माण क्षेत्र, टेक्नोलॉजी, और सर्विस सेक्टर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो रोजगार के अवसरों को भी बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय सरकार की ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति, युवा कार्यबल, और मजबूत बैंकिंग प्रणाली भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े ताकतवर हिस्से बन चुके हैं।
चीन का लड़खड़ाता भविष्य
चीन की स्थिति भारत से विपरीत दिख रही है। एक समय था जब चीन ने अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से पूरी दुनिया को चौंका दिया था, लेकिन अब वह लगातार गिरावट की ओर बढ़ रहा है। ग्लोबल GDP में चीन का हिस्सा 1990 में केवल 2 प्रतिशत था, जो 2021 तक बढ़कर 18.4 प्रतिशत हो गया था। लेकिन अब यह घटकर 17 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, और अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में यह गिरावट जारी रहेगी। इसका मुख्य कारण चीन की कामकाजी आबादी में लगातार गिरावट है, जो पहले से ही एक दशक से घट रही है और अगले तीन दशकों में यह और घटकर 10 प्रतिशत तक रह सकती है।
चीन की अर्थव्यवस्था में इस गिरावट के कई कारण हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है उसका घटता हुआ कामकाजी जनसंख्या, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता पर दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही, चीन की आक्रामक विदेश नीति और कई देशों के साथ चल रहे विवाद भी उसकी स्थिति को कमजोर कर रहे हैं। चीन विरोधी लहर ने यूरोप और अमेरिका सहित कई देशों में उसकी छवि को नुकसान पहुँचाया है, जो चीन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
भारत और चीन के विकास की तुलना
चीन और भारत के विकास दर के अंतर को देखना भी महत्वपूर्ण है। 2023 में भारत की औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत से अधिक रही, जबकि चीन की औसत विकास दर 5.2 प्रतिशत रही। बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार, 2028 तक भारत की विकास दर चीन से अधिक रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) का अनुमान है कि 2024 में चीन की विकास दर 4.6 प्रतिशत रहेगी, जो 2028 तक घटकर 3.5 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।
इसके अलावा, यूरोपीय संसद के थिंक टैंक के विशेषज्ञ एंजेलोस डेलिवोरियास का मानना है कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर चीन से अधिक होना, नई दिल्ली को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरने का संकेत है। जो भारत के लिए बेहतर कहा जा सकता हैं।

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