चीन से धीरे-धीरे आगे निकलता भारत, टेंशन में ड्रैगन

नई दिल्ली: भारत धीरे-धीरे चीन से आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रहा है, और इसके परिणामस्वरूप चीन के लिए कुछ आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर, शेयर बाजार, और अन्य आर्थिक संकेतक यह दर्शाते हैं कि भारत ने कई मोर्चों पर चीन को पीछे छोड़ने लगा हैं।

1. विकास दर (Growth Rate):

भारत की विकास दर चीन से बेहतर हो रही है। 2023-24 में भारत की विकास दर लगभग 6-7% तक रही है, जबकि चीन की वृद्धि दर धीमी पड़कर 5% के आसपास रही है। COVID-19 महामारी के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार की गति धीमी रही है, जबकि भारत ने महामारी से जल्दी उबरते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है।

भारत का डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे में निवेश, और उपभोक्ता खपत को बढ़ावा देने के कारण आर्थिक वृद्धि दर स्थिर बनी हुई है। चीन में वृद्धिशील विकास दर और जनसंख्या का वृद्धावस्था की ओर बढ़ना प्रमुख समस्याएँ बन रही हैं।

2.2010 से पहले चीन का प्रमुख स्थान:

2000 के दशक तक, चीन की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार तेजी से बढ़े थे, और वह दुनिया में एक प्रमुख निवेश गंतव्य बन चुका था। शंघाई स्टॉक एक्सचेंज (SSE) और शेन्ज़ेन स्टॉक एक्सचेंज (SZSE) चीन के शेयर बाजार के दो प्रमुख केंद्र थे। चीन का उच्च आर्थिक विकास और सरकारी नीतियों ने उसके शेयर बाजार को दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों में से एक बना दिया था।

2. भारत ने 2010 में बढ़त बनाई:

मई 2010 में, Nifty और Sensex जैसे प्रमुख भारतीय इंडेक्सों ने जबरदस्त वृद्धि की और भारत का बाजार पहली बार चीन से बड़ा हो गया। भारत ने अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार किया, जिससे विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा, जिससे भारतीय शेयर बाजार आकर्षक हो गया।

3.भारत ने 2015 के बाद फिर से बढ़त बनाई:

2015 के बाद, भारत ने धीरे-धीरे फिर से चीन से आगे बढ़ते हुए अपना प्रभुत्व कायम किया। इसके पीछे कई कारण थे। भारत की आर्थिक विकास दर, जो 2015 के बाद तेज़ हुई, ने निवेशकों का विश्वास और आकर्षण बढ़ाया। भारत ने तेज़ी से विकास किया, जबकि चीन की विकास दर स्थिर हो गई। आज भारत का शेयर बाजार चीन से बड़ा हो गया हैं।

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