भारत और चीन में किसका सुरक्षा कवच मजबूत

नई दिल्ली: भारत और चीन दोनों ही देशों के पास अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम हैं, लेकिन इनकी संरचना, क्षमताएं और तकनीकी विकास में कुछ भिन्नताएँ हैं। दोनों देशों ने अपने-अपने हवाई रक्षा प्रणालियों को लगातार उन्नत किया है, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:

1. भारत के एयर डिफेंस सिस्टम:

एक्सोसेट मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Aakash): यह एक मीडियम-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है जो भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना द्वारा उपयोग किया जाता है। यह विभिन्न प्रकार के विमानों और मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है।

S-400: रूस से खरीदी गई इस प्रणाली को भारत ने हाल ही में सेवा में शामिल किया है। यह लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है। इसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता हैं।

MRSAM (Medium-Range Surface-to-Air Missile): यह भारत और इजराइल का संयुक्त उत्पाद है, जो मध्यम रेंज के एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम के रूप में कार्य करता है। इसे भी एक ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता हैं।

Barak-8: यह भारतीय और इजरायली तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। यह एक मध्यम रेंज की एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल है जो नौसेना और वायु सेना में इस्तेमाल होती है।

पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD): यह भारत की स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणालियां हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन की गई हैं। 

2. चीन के एयर डिफेंस सिस्टम:

HQ-9: यह चीन का सबसे प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम है, जो S-300 की तरह लंबी दूरी तक लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है। यह एक जमीन-से-हवा मिसाइल है जो उच्च ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों और मिसाइलों को निशाना बनाता है।

HQ-16: यह एक मध्यम रेंज का एयर डिफेंस सिस्टम है, जो विशेष रूप से फाइटर जेट्स और बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ प्रभावी है।

DF-21D: यह चीन का एक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है, जिसे समुद्री लक्ष्यों के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन यह किसी हवाई रक्षा प्रणाली का हिस्सा नहीं है।

S-400 (रूस से): बता दें की चीन ने भी रूस से S-400 सिस्टम खरीदा है, जो उसे लंबी दूरी तक एयर डिफेंस प्रदान करता है।

0 comments:

Post a Comment