मामला क्या है?
राज्य सूचना आयोग की 11 अदालतों में मार्च 2024 से नवंबर 2024 के बीच कुल 8,158 मामलों का निस्तारण किया गया है। इन मामलों में आयोग ने विभिन्न आदेश दिए थे, लेकिन इन आदेशों को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया। इससे न सिर्फ आम नागरिकों को परेशानी हुई, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के लिए भी यह एक बड़ी लापरवाही साबित हुई।
जांच और कार्रवाई
इस पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद आयोग की संयुक्त रजिस्ट्रार ने मामले की जांच की। इसके बाद सचिव अभय सिंह को एक रिपोर्ट दी गई, जिसमें यह कहा गया कि राज्य सूचना आयुक्तों और मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा जारी आदेशों को शीघ्र वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। सचिव ने कर्मचारियों को 17 जनवरी तक सभी आदेशों को वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
कर्मचारी वेतन पर असर
सचिव के आदेश के बाद, उन कर्मचारियों का वेतन रोकने का आदेश दिया गया है, जो इन आदेशों को वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर रहे थे। वेतन रोकने की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि यह कदम कर्मचारियों को काम में गंभीरता लाने के लिए उठाया गया है।
आयोग का उद्देश्य
राज्य सूचना आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जारी किए गए आदेशों की जानकारी आम जनता तक शीघ्र पहुंच सके। इसके लिए आयोग द्वारा जारी किए गए आदेशों को वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है ताकि नागरिक आसानी से इन आदेशों को देख सकें और इनसे संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकें।

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