इस योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को तीन बकरियों की एक इकाई के रूप में अनुदान दिया जाएगा, जिसकी कुल लागत 15,000 रुपए तय की गई है। सरकार सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 80% अनुदान देती है, यानी उन्हें 12,000 रुपए मिलेंगे। वहीं, अनुसूचित जाति और जनजाति के लाभार्थियों को 90% अनुदान यानी 13,500 रुपए दिए जाएंगे। इस प्रकार, यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बकरी पालन को एक आकर्षक और व्यावसायिक अवसर बना सकती है।
2017 की पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार, बांका जिले में बकरियों की संख्या लगभग 4.38 लाख है, जिसमें ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां प्रमुख हैं। वहीं, जिले में भेड़ों की संख्या लगभग 9,000 के आसपास है, जो कि बकरियों के मुकाबले बहुत कम है।
इस योजना की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक बीपीएल परिवार को केवल एक इकाई का ही लाभ मिलेगा। इस कदम से अधिक से अधिक बीपीएल परिवारों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा और बकरी पालन से जुड़ी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा। सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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