आमतौर पर, टेस्टिस में शुक्राणुओं का निर्माण और उनका परिपक्व होना एक दिन के भीतर निरंतर चलता रहता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया (शुक्राणु का निर्माण से लेकर परिपक्व होने तक) में लगभग 64 से 72 दिन लगते हैं। इसलिए पुरुषों को अपना वीर्य ज्यादा बर्बाद नहीं करनी चाहिए।
प्राथमिक शुक्राणु कोशिका:
अंडकोष के भीतर सेमिनिफेरस ट्यूब्यूल्स (seminiferous tubules) नामक छोटे नलिकाओं में शुक्राणुओं का निर्माण होता है। जब स्पर्मेटोगोनिया कोशिकाएं वृद्धि करती हैं, तो वे प्राथमिक शुक्राणु कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं। ये कोशिकाएं मेयोसिस (गुणसूत्रों की आधी संख्या के साथ विभाजन) से गुजरती हैं ताकि दो द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाएं बन सकें।
द्वितीयक शुक्राणु कोशिका:
मेयोसिस के दूसरे चरण में, प्रत्येक द्वितीयक शुक्राणु कोशिका हाफ संख्या वाले गुणसूत्र (haploid) वाली स्पर्मेटिड्स (spermatids) में विभाजित होती है। स्पर्मेटिड्स पूरी तरह से परिपक्व होकर शुक्राणु (spermatozoa) में बदलते हैं। इस चरण में, शुक्राणु में एक लंबी दण्ड (tail) बनती है, जो उसे गतिशील (motility) बनने में मदद करती है।
शुक्राणु का भंडारण और परिपक्वता:
परिपक्व होने के बाद, शुक्राणु अंडकोष के एपिडिडिमिस (epididymis) में जमा होते हैं। यहां, वे अंतिम रूप से परिपक्व होते हैं और पूरी तरह से गतिशील बन जाते हैं। बता दें की वीर्य केवल अंडकोष में नहीं बनता। सीमेन के निर्माण में प्रोस्टेट ग्रंथि, सेमिनल वेसिकल्स, और बुल्बोयुरेथ्रल ग्रंथियां भी योगदान देती हैं।
ये ग्रंथियां वीर्य को प्रोटीन, शर्करा, एंजाइम, और रासायनिक पदार्थों से भरती हैं, जो शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करते हैं और उन्हें प्रजनन मार्ग में यात्रा करने में सहायता करते हैं। वीर्य में मौजूद शुक्राणु महिला के अंडे से मिलकर एक जीवन का निर्माण करते हैं।
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