केंद्र और राज्य मिलकर निर्माण
केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय की टीम द्वारा उपयुक्त जमीन का निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार किए जाने के बाद तारामंडल के निर्माण का कार्य शुरू होगा। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच इस परियोजना के लिए लागत का समान वितरण होगा। प्रत्येक तारामंडल के निर्माण पर लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बराबर राशि खर्च की जाएगी।
बिहार में पहले से हैं दो तारामंडल
राज्य में पहले से ही पटना और दरभंगा में तारामंडल स्थापित हैं। पटना में स्थित तारामंडल में चार अलग-अलग थीम पर शो आयोजित किए जाते हैं, जबकि दरभंगा में तारामंडल का संचालन वहां के इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा किया जाता है। इन तारामंडलों का उद्देश्य बच्चों और आम लोगों को सौरमंडल और अंतरिक्ष से संबंधित विशेष जानकारी प्रदान करना है।
सभी जिलों में तारामंडल स्थापित करने का लक्ष्य
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह ने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य राज्य के सभी जिलों में तारामंडल स्थापित करना है। इसके तहत जमुई, पूर्णिया और मोतिहारी में जमीन का चयन कर लिया गया है और यहां शीघ्र ही तारामंडल स्थापित किए जाएंगे।
आधुनिक तकनीक से लैस होंगे नए तारामंडल
पटना स्थित तारामंडल में अत्याधुनिक प्रोजेक्टर और सुपर कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता है। यहां लेजर तकनीक के माध्यम से थ्रीडी चित्र भी दर्शाए जाते हैं। थ्रीडी चित्रों को देखने के लिए दर्शकों को विशेष चश्मे दिए जाते हैं, जिनकी कीमत 12 हजार रुपये होती है। यदि चश्मे को क्षति पहुँचती है, तो दर्शकों से 4 हजार रुपये का जुर्माना भी लिया जाता है। शो समाप्त होने के बाद प्रत्येक चश्मे को पूरी तरह से स्टरलाइज किया जाता है। नए तारामंडल में भी ये सुविधा होगी।

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