बिहार में जमीन के बंटवारा को लेकर 4 नए नियम!

पटना: बिहार में इस समय जमीन सर्वे का काम चल रहा हैं। इसी बीच बिहार में भूमि बंटवारे को लेकर कई नए नियमों की घोषणा की गई है, जिनका उद्देश्य भूमि के उचित और पारदर्शी बंटवारे को सुनिश्चित करना है। यह नियम निम्नलिखित हैं:

बिहार में जमीन के बंटवारा के नियम!

1 .यदि हुआ हैं मौखिक बंटवारा: अगर किसी खतियानी जमीन का कागजी बंटवारा नहीं हुआ है और मौजूदा वंशज आपस में मौखिक रूप से अलग-अलग प्लॉटों को जोत-आबाद कर रहे हैं, तो उन वंशजों के नाम पर संयुक्त खाता खोला जाता है। 

2 .सर्वे के दौरान भी कर सकते हैं बंटवारा: यदि सर्वे के दौरान इन वंशजों के बीच आपसी सहमति से बंटवारे का प्रमाण (बंटवारानामा) तैयार किया जाता है और इसका शपथ पत्र अमीन को प्रस्तुत किया जाता है, तो सभी वंशजों के नाम पर अलग-अलग खाता खोला जा सकता है।

3 .केवाला भूमि का खाता खोलना: यदि जमीन केवाला (भूमि पर मालिकाना हक के लिए कोई दस्तावेज़) के माध्यम से ली गई है, तो सर्वे के दौरान संबंधित केवाला दिखाकर और रसीद के आधार पर खाता खोला जाएगा। इस आधार पर सर्वे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

4 .बेलगान (खरीदी-बिकी) भूमि का खाता खोलना: बेलगान भूमि का सर्वे कर खाता खोला जाएगा। सर्वे के दौरान यह देखा जाएगा कि रैयत संबंधित भूमि खतियानी रैयत है या इसे खरीद-बिक्री के माध्यम से प्राप्त किया गया है। इसके बाद, भूमि के अनुरूप वर्तमान रैयत के नाम पर खाता खोला जाएगा और लगान (कर) भी निर्धारित किया जाएगा।

इन नए नियमों से भूमि का बंटवारा अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित होगा, जिससे जमीन के मालिकों को उनके अधिकारों का सही तरीके से निर्धारण हो सकेगा। 

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