बता दें की इस सर्किट में कुल सात जिले शामिल होंगे: प्रयागराज, काशी (वाराणसी), चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और भदोही। यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक दृष्टिकोण से एक नया मॉडल बनेगा, जिसका उद्देश्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देना है।
धार्मिक सर्किट की रूपरेखा:
योगी आदित्यनाथ ने इस बात का खुलासा किया कि वाराणसी और प्रयागराज को मिलाकर एक विशाल धार्मिक क्षेत्र बनाया जाएगा, जिसमें इन दोनों प्रमुख शहरों के साथ-साथ आसपास के छह जिलों को भी जोड़ा जाएगा। इस क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 22,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक होगा, जो इस परियोजना के महत्व को दर्शाता है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र का विकास करने के लिए एक क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (Regional Development Authority) स्थापित करने की योजना बनाई है।
क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण का गठन:
वाराणसी और प्रयागराज को मिलाकर एक नया विकास प्राधिकरण बनाए जाने से इन दोनों शहरों की धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक क्षमता को सही तरीके से उपयोग किया जा सकेगा। इस प्राधिकरण के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पूरे क्षेत्र का समग्र विकास किया जाएगा। इसके तहत न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि औद्योगिक विकास, नॉलेज पार्क और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
रोजगार और आर्थिक विकास:
धार्मिक सर्किट के इस बड़े विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों और नॉलेज पार्क की स्थापना से क्षेत्र में रोजगार की नई राहें खुलेंगी। इसके अलावा, स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को भी लाभ होगा, क्योंकि यह सर्किट पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसर बढ़ाएगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
इस धार्मिक सर्किट का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे कि प्रयागराज, काशी, मिर्जापुर आदि के महत्व को बढ़ाना और इन्हें विश्व स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह सर्किट न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी बढ़ावा देगा।
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