मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि न्यूनतम मजदूरी या उससे कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को 17,000 से 20,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। यह कदम उन कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है जो वर्तमान में कम वेतन पर काम कर रहे हैं, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण ठीक से कर सकें।
बता दें की इस प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे कैबिनेट से भी पास कराया जाएगा। इस निर्णय में विभिन्न विभागों में तैनात संविदाकर्मियों, आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मचारियों, और दैनिक वेतन भोगियों को भी शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि वर्तमान में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत जो वेतन दिया जा रहा है, वह उचित नहीं है, इसलिए इसमें वृद्धि की आवश्यकता महसूस की गई है। इसके अलावा, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी इस बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा, जिससे उनके वेतन में भी सुधार होगा। यह कदम कर्मचारियों के आर्थिक स्थिति को सुधारने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
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