कावेरी इंजन की टेस्टिंग प्रक्रिया
कावेरी इंजन का परीक्षण अब वास्तविक उड़ान स्थितियों में किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष फ्लाइंग टेस्ट बेड (FTB) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे कई चरणों में परीक्षण और मूल्यांकन के लिए तैयार किया गया है। परीक्षणों के इस चरण में इंजन की कार्यक्षमता, स्थिरता और सुरक्षा को परखा जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह इंजन वास्तविक युद्धक परिस्थितियों में प्रदर्शन करने के लिए तैयार है।
यह परीक्षण रूस के ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित किया जाएगा, जो मास्को के पास स्थित है। इस परीक्षण के लिए विशेष रूप से IL-76 विमान का उपयोग किया जाएगा, जिसे पूरी तरह से संशोधित किया गया है। इनफ्लाइट परीक्षण की मंजूरी तब दी गई, जब रूस में किए गए उच्च-ऊँचाई सिमुलेशन और भारत में किए गए गहन ग्राउंड ट्रायल्स ने इस इंजन को वास्तविक संचालन के लिए सक्षम साबित किया।
ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट में परीक्षण
पिछले साल रूस में केंद्रीय विमानन मोटर संस्थान (CIAM) में कावेरी इंजन के उच्च-ऊँचाई परीक्षण किए गए थे, जिनमें 13,000 मीटर (42,651 फीट) की ऊँचाई तक इंजन का परीक्षण किया गया था। इस सिमुलेशन के दौरान इंजन की प्रदर्शन क्षमता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया। इन परीक्षणों के परिणामों के आधार पर कावेरी इंजन के लिए उड़ान परीक्षणों की मंजूरी दी गई।
भारत का लक्ष्य और भविष्य की योजना
GTRE और DRDO का लक्ष्य 2025 तक सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करना और 2025-26 तक सीमित उत्पादन शुरू करना है। इसके साथ ही भारत के पास स्वदेशी एयरो-इंजन बनाने की क्षमता विकसित हो जाएगी, जो रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। कावेरी इंजन के सफल परीक्षण और उत्पादन से भारत को अपने वायुसेना के बेड़े को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
दुनिया के प्रमुख देशों की स्थिति
दुनिया के केवल पांच देश – ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और चीन – ऐसे हैं जिनके पास एडवांस जेट इंजन बनाने की तकनीक है। ये वे देश हैं जिनके पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में वीटो पावर का अधिकार भी है। भारत अब इस एलीट क्लब में शामिल होने की दिशा में अग्रसर है, और कावेरी इंजन का विकास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
चीन की बढ़ रही हैं चिंताएँ
चीन, जो खुद जेट इंजन बनाता हैं, अब भारत के इस प्रयास को लेकर चिंतित है। स्वदेशी फाइटर जेट इंजन के निर्माण से भारत को अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जो चीन के लिए रणनीतिक दृष्टि से चिंता का कारण हो सकता है। हालांकि, भारत इस मामले में अपना आत्मनिर्भरता लक्ष्य स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर चुका है और इस परियोजना के सफल होने से देश का रक्षा क्षेत्र और भी सशक्त होगा।
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