कभी भारत से भी गरीब था चीन, आज कितना अंतर?

न्यूज डेस्क: चीन ने पिछले चार दशकों में अपनी अर्थव्यवस्था को बेतहाशा बढ़ाया है, जबकि भारत विकास के मामले में पीछे रह गया है। चीन के सुधार और आर्थिक प्रगति ने उसे वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शक्ति बना दिया है। इस विकास के पीछे की मुख्य वजह आर्थिक सुधार, उत्पादन में वृद्धि, शहरीकरण, और शिक्षा में सुधार हैं। 

चीन का मॉडल भारत के लिए एक चुनौती है और यह दिखाता है कि यदि सुधार सही तरीके से लागू किए जाएं तो एक देश कितनी तेजी से अपनी अर्थव्यवस्था को समृद्ध कर सकता है। 1978 में, जब चीन ने अपनी आर्थिक सुधार प्रक्रिया शुरू की थी, तब उसकी प्रति व्यक्ति आय भारत से कहीं कम थी। लेकिन अब चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जबकि भारत पिछड़ गया है।

चीन का विकास:

चीन का आर्थिक सुधार 1978 में हुआ था जब देंग जियाओपिंग ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की। इसके बाद चीन ने उत्पादन, उद्योग, शिक्षा और भूमि सुधारों में तेजी से कदम बढ़ाए, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। 1978 में चीन की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 155 डॉलर थी, जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय 210 डॉलर थी। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। 2023 में चीन की प्रति व्यक्ति आय लगभग 12,621 डॉलर तक पहुंच गई है, जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2239 डॉलर के करीब है।

भारत की स्थिति:

भारत में आर्थिक सुधार 1991 में शुरू हुए थे, लेकिन चीन ने इन सुधारों को काफी पहले अपनाया था और इसका असर ज्यादा तेजी से हुआ। चीन ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी जबरदस्त वृद्धि की है, और वह अब दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग सुपरपॉवर बनने की ओर अग्रसर है। वहीं, भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता चीन से 1.6 गुना कम है।

आर्थिक रिपोर्ट:

एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि चीन अब दुनिया के अमीर देशों में शामिल हो गया हैं। दुनिया की अन्य कई एजेंसियों के अनुसार, चीन की वर्तमान संपत्ति 19 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जबकि पहले नंबर पर अमेरिका की संपत्ति 23 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है।

चीन में बदलाव:

चीन में बदलाव 1978 के बाद तीव्र गति से हुआ। तब वहां 90% लोग गरीबी में रहते थे और सिर्फ 20% लोग ही शहरों में निवास करते थे। अब चीन का आर्थिक विकास बहुत तेज़ हुआ है और वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है। 40 साल पहले चीन का हिस्सा दुनिया की अर्थव्यवस्था में महज 1.8% था, लेकिन 2017 में वह बढ़कर 18.2% हो गया।

चीन की मैन्युफैक्चरिंग:

चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भारत से 1.6 गुना अधिक है। इसका मतलब है कि चीन की उत्पादकता भारत से 60% ज्यादा है। इसके अलावा, चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है, और वह विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी दुनिया में तीसरे स्थान पर है। चीन ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण करके अपनी मैन्युफैक्चरिंग और व्यापार को बढ़ावा दिया है।

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