भारत पर कितना विदेशी कर्ज, जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में तेज गति से विकास किया है, लेकिन इस विकास के साथ ही देश पर विदेशी कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। हाल ही में भारत सरकार ने इस बारे में आंकड़े जारी किए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश का विदेशी कर्ज काफी बढ़ चुका है और यह अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2024 तक भारत का कुल विदेशी कर्ज 711.8 अरब डॉलर (लगभग 58.6 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा जून 2024 की तुलना में 4.3 प्रतिशत अधिक है। जून में भारत का विदेशी कर्ज 682.2 अरब डॉलर था। केवल तीन महीनों के भीतर, यानी जुलाई से सितंबर 2024 के बीच, भारत के विदेशी कर्ज में 29.6 अरब डॉलर (करीब 2.52 लाख करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी हुई है।

विदेशी कर्ज और जीडीपी का अनुपात

सितंबर 2024 तक भारत का विदेशी कर्ज, उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 19.4 प्रतिशत था। जून 2024 में यह अनुपात 18.8 प्रतिशत था। इससे यह संकेत मिलता है कि कर्ज की दर जीडीपी के मुकाबले बढ़ रही है, जो एक चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि अधिक कर्ज का अर्थ है भविष्य में ब्याज भुगतान का अधिक बोझ, जो सरकार की वित्तीय स्थिति पर असर डाल सकता है।

भारत द्वारा लिए गए कर्ज के स्रोत

भारत के विदेशी कर्ज में विभिन्न मुद्राओं का मिश्रण है, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी अमेरिकी डॉलर की है। सितंबर 2024 में भारत के विदेशी कर्ज का 53.4 प्रतिशत अमेरिकी डॉलर में था। इसके बाद भारतीय रुपया (31.2 प्रतिशत), जापानी येन (6.6 प्रतिशत), एसडीआर (विशेष आहरण अधिकार) (5 प्रतिशत) और यूरो (3 प्रतिशत) का स्थान रहा। 

क्या यह कर्ज भारत के लिए खतरा बन सकता है?

वर्तमान में, भारत की विदेशी कर्ज की स्थिति इतनी गंभीर नहीं है कि वह एक तत्काल वित्तीय संकट का कारण बने। हालांकि, अगर कर्ज का स्तर और ब्याज दर बढ़ती है, तो यह भविष्य में एक बड़ी चुनौती हो सकती है। सरकार को विदेशी कर्ज के प्रबंधन में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है, ताकि वह अपने विकास लक्ष्यों को पूरा करने के साथ-साथ कर्ज के बोझ को भी नियंत्रित कर सके।

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