भारत का पीछा करने में अब हांफ रहा है चीन!

नई दिल्ली: भारत और चीन, दोनों एशिया के प्रमुख आर्थिक शक्ति हैं, लेकिन हाल के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने एक शानदार उछाल दर्ज किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की आर्थिक विकास दर, चीन की तुलना में तेज़ बढ़ रही है, और यह संकेत है कि भारत जल्द ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान पर पहुंच सकता है।

वित्त वर्ष 2022-23 में भारत की जीडीपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत रही थी, जो चीन की तुलना में काफी अधिक थी। वहीं, चीन की विकास दर इस समय धीमी गति से बढ़ रही है। चीन की आर्थिक वृद्धि 2025 में 4 से 4.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो कि पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। यह धीमी विकास दर चीन की लंबी अवधि की समस्याओं और वैश्विक व्यापार तनावों के कारण हो सकती है।

भारत की बढ़ती ताकत:

बार्कलेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत की विकास दर 8 प्रतिशत के आसपास बनी रहती है, तो 2028 तक वैश्विक जीडीपी में भारत का योगदान 16 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस विकास दर के साथ भारत को एक बड़े वैश्विक आर्थिक खिलाड़ी के रूप में देखा जा सकता है, जो न केवल एशिया, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी आर्थिक शक्ति का प्रभावी प्रदर्शन करेगा।

चीन का विकास:

वहीं, चीन की विकास दर में अपेक्षित कमी के कारण उसकी वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी घटकर 26 प्रतिशत रह सकती है। चीन, जो पहले दुनिया की सबसे तेज़ विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था थी, अब धीमे विकास की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा, चीन के आर्थिक मॉडल में बदलाव की आवश्यकता भी महसूस हो रही है, क्योंकि पहले की उच्च दर की वृद्धि अब कठिनाई का सामना कर रही है।

भारत का पीछा करने में अब हांफ रहा है चीन!

भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और चीन की धीमी विकास दर दोनों ही संकेत देते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बदलाव आ रहा है। जहां एक ओर चीन अपनी समस्याओं से जूझ रहा है, वहीं भारत अपने विकास को बढ़ा रहा है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान मजबूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि क्या भारत वैश्विक नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण स्थान बना पाएगा। वहीं, वर्त्तमान में भारत के विकास दर का पीछा करने में चीन हांफ रहा हैं।

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