चीन- अमेरिका में बढ़ सकता है टकराव, ट्रंप जंग को तैयार

न्यूज डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ लेने के बाद से ही उनके बयान और नीतियाँ विश्वभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं। हाल ही में ट्रंप ने पनामा नहर को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा किया है। उनका कहना है कि पनामा नहर का संचालन चीन के हाथों में है, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 1999 के अंत में पनामा नहर ट्रांसफर करने की जो डील हुई थी, वह अमेरिका के लिए एक नुकसानदायक समझौता था और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पनामा नहर का महत्व:

पनामा नहर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जो कैरेबियन सागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है। यह नहर वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि इससे करीब 6 फीसदी वैश्विक व्यापार का संचालन होता है। इसकी लंबाई 82 किलोमीटर और चौड़ाई 90 मीटर है। इसका नियंत्रण विश्व के व्यापारिक मार्गों पर एक अहम प्रभाव डालता है।

ट्रंप का आक्रामक रुख:

डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर को लेकर एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी बात यह है कि पनामा नहर का संचालन चीन कर रहा है। हम इसे चीन को नहीं सौंप सकते। यह नहर हमने पनामा को दी थी, अब हम इसे वापस लेंगे।" ट्रंप ने पनामा नहर के नियंत्रण को लेकर सैन्य बल के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं किया। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह पनामा के संप्रभुता पर सीधा सवाल उठाता है।

1999 की डील पर सवाल:

पनामा नहर का नियंत्रण 1999 में पनामा को सौंप दिया गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इस पर समझौता किया। इस समझौते के तहत पनामा नहर की देखरेख और संचालन का जिम्मा पनामा सरकार को सौंपा गया। ट्रंप का कहना है कि यह समझौता "मूर्खतापूर्ण गिफ्ट" था और यह अमेरिका के हितों के खिलाफ था। उनका मानना है कि इस नहर पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए, क्योंकि यह न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

चीन का बढ़ता प्रभाव:

हाल के कुछ वर्षों में, यह आरोप लगाया जा रहा था कि चीन का पनामा नहर में दखल बढ़ा है। हालांकि, पनामा ने बार-बार यह खारिज किया है कि नहर का संचालन चीन के हाथों में है। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने ट्रंप के बयान का जवाब देते हुए कहा कि पनामा नहर पर पूरा नियंत्रण पनामा के पास है और इसे किसी अन्य देश के हाथों में नहीं दिया गया है। पनामा का कहना है कि नहर का संचालन पूरी तरह से पनामा की सरकार के नियंत्रण में है और चीन का इसमें कोई अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है।

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