इस क्षेत्र में भी चीन से आगे निकला भारत: रिपोर्ट

नई दिल्ली: 2025 की QS वर्ल्ड एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस रैंकिंग में भारत ने लगातार दूसरे साल चीन को पीछे छोड़ते हुए अपनी स्थिति मजबूत की है। इस बार भारत के 148 विश्वविद्यालय इस रैंकिंग में शामिल हुए, जबकि चीन के केवल 133 शैक्षणिक संस्थान इस सूची में थे। यह बदलाव भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में हो रहे सुधारों और उसकी वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग के 2025 संस्करण में एशिया की 25 प्रमुख उच्च शिक्षा प्रणालियों के कुल 984 विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 127 विश्वविद्यालयों से अधिक है, जो यह संकेत देती है कि एशिया में उच्च शिक्षा के स्तर में तेजी से सुधार हो रहा है।

भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय

भारत में इस बार कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने अपनी जगह बनाई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने शीर्ष स्थान पर अपनी पकड़ बनाई है, जबकि आईआईटी बॉम्बे दूसरे स्थान पर आ गया है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बैंगलोर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी कानपुर जैसे विश्वविद्यालयों ने भी उच्च रैंकिंग हासिल की है।

चीन का स्थिति

चीन में पेकिंग विश्वविद्यालय को सबसे अच्छे विश्वविद्यालय के रूप में माना जाता है। हालांकि, चीन के कुल 133 विश्वविद्यालयों में से अधिकतर विश्वविद्यालयों को उच्च रैंक नहीं मिली, जो चीन की शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता की ओर इशारा करता है। भारत के साथ तुलना में, चीन के विश्वविद्यालयों की संख्या कम होने के बावजूद, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अधिक संस्थानों को सूची में शामिल करने के साथ अपनी अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को मजबूत किया है।

भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार

भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से सुधार हुआ है। शोध में वृद्धि, उच्च-प्रशिक्षित फैकल्टी की संख्या, और अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों ने भारतीय विश्वविद्यालयों की वैश्विक पहचान को बढ़ाया है। भारतीय विश्वविद्यालयों का बढ़ता प्रदर्शन यह दिखाता है कि भारत अपने उच्च शिक्षा क्षेत्र में लगातार सुधार कर रहा है, और इसका असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है।

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