मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में कृषि, आवासीय और व्यावसायिक जमीनों की सर्किल दरों को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रजिस्ट्रेशन की दरें पारदर्शी और न्यायपूर्ण हों, और इससे जनता को आर्थिक रूप से मदद मिल सके।
बैठक में यह भी साफ किया गया कि अगर किसी कृषि भूमि पर एक या दो मकान बनते हैं, तो उसे आवासीय भूमि की श्रेणी में नहीं डाला जाएगा। इसी प्रकार, अगर कृषि भूमि पर एक-दो दुकानें बनी हैं, तो उसे व्यावसायिक भूमि के रूप में नहीं माना जाएगा। यह कदम उन मामलों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जहां कृषि भूमि का इस्तेमाल गैर-कृषि कार्यों के लिए किया जा रहा था, और इससे भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी हो रही थी।
मुख्य मुद्दे जो चर्चा में रहे:
सर्किल दरों का निर्धारण: सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सर्किल दरें आम जनता की पहुंच में हों और संपत्ति के लेन-देन को सरल बनाया जाए।
कृषि भूमि का श्रेणी निर्धारण: यदि कृषि भूमि पर कुछ मकान या दुकानें बनती हैं, तो उन्हें केवल उसी क्षेत्र के लिए उपयुक्त श्रेणी में रखा जाएगा, न कि उन्हें आवासीय या व्यावसायिक भूमि में बदल दिया जाएगा।
भिन्नता को समाप्त करना: राज्य के अलग-अलग जिलों के बीच दरों में होने वाली भिन्नता को समाप्त किया जाएगा, जिससे संपत्ति की कीमतों में समानता आएगी।
नई प्रणाली: मनमाने तरीके से सर्किल दरें तय करने की प्रथा को खत्म किया जाएगा और सर्किल दरों की पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
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