कई आईआईटी स्नातकों ने अपनी उच्च शिक्षा और शानदार करियर को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया है। इन युवाओं ने यह साबित किया कि जीवन में संतुलन और आंतरिक शांति की तलाश हमेशा तकनीकी सफलता से ऊपर हो सकती है।
IIT से पढ़ें ये 9 इंजीनियर बने साधु, जानें सभी के नाम
1 .आचार्य प्रशांत (Acharya Prashant)
आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करने वाले आचार्य प्रशांत ने अपने कॉर्पोरेट करियर को त्यागकर आध्यात्मिक मार्ग पर कदम रखा। वह आज एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते हैं और उन्होंने अपनी किताबों के माध्यम से जीवन के गहरे प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया है।
2 .गौरंग दास (Gaurang Das)
आईआईटी बॉम्बे से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करने वाले गौरंग दास ने इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) से जुड़कर आध्यात्मिकता का रास्ता अपनाया। गौरंग दास सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं और वे अनेक आध्यात्मिक किताबों के लेखक हैं। उनके विचार और शिक्षाएं लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।
3 .अभय सिंह (Abhay Singh)
आईआईटी बॉम्बे से ऐरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक अभय सिंह ने कनाडा में एक शानदार करियर को त्यागकर संन्यास लिया। उनकी जीवन यात्रा ने उन्हें "आईआईटी बाबा" के नाम से प्रसिद्ध किया। अब वह अध्यात्म के मार्ग पर चलकर समाज को जागरूक कर रहे हैं।
4 .संकेत पारिख (Sanket Parikh)
संकेत पारिख, जिन्होंने आईआईटी बॉम्बे से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, ने अमेरिका में अपने शानदार करियर को छोड़कर जैन संन्यास लिया। उनके जीवन का उद्देश्य अब साधना, तपस्या और आध्यात्मिक उन्नति है। वह जैन दर्शन और शांति के संदेश को फैलाने में जुटे हुए हैं।
5 .महान एमजे (Mahan MJ)
आईआईटी कानपुर और यूसीएलए से पीएचडी करने वाले महान एमजे ने रामकृष्ण मठ के संन्यासी के रूप में आध्यात्मिक जीवन अपनाया। वह वर्तमान में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई में गणित के प्रोफेसर हैं, लेकिन साथ ही वे हाइपरबोलिक ज्योमेट्री और ज्योमेट्रिक ग्रुप थ्योरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं।
6 .अविरल जैन (Aviral Jain)
आईआईटी बीएचयू से कंप्यूटर साइंस में स्नातक अविरल जैन ने वालमार्ट में अपनी नौकरी छोड़कर जैन संन्यास लिया। उन्होंने कॉर्पोरेट जीवन से बाहर निकलकर साधना और तपस्या की राह चुनी और अब अपनी आध्यात्मिक यात्रा में अग्रसर हैं।
7 .सन्यास महाराज (Sanyas Maharaj)
आईआईटी से स्नातक करने वाले सन्यास महाराज को उनके गहरे आध्यात्मिक ज्ञान और मठ समुदाय में योगदान के लिए जाना जाता है। उनका जीवन यह दर्शाता है कि आंतरिक शांति और आत्म-साक्षात्कार के लिए समर्पण कितना महत्वपूर्ण है।
8 .स्वामी मुकुंदानंद (Swami Mukundanand)
स्वामी मुकुंदानंद, जो आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं, ने जगद्गुरु कृष्णपालजी योग की स्थापना की। वे योग, ध्यान, और आध्यात्म पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिख चुके हैं और विश्वभर में आध्यात्मिक और कल्याण कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। उनका उद्देश्य लोगों को संतुलित और समृद्ध जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
9 .स्वामी विद्यनाथ नंद (Swami Vidyanand Nand)
आईआईटी कानपुर से स्नातक और यूसीएलए से पीएचडी करने वाले स्वामी विद्यनाथ नंद ने रामकृष्ण मठ से जुड़कर अपने जीवन को आध्यात्मिकता के लिए समर्पित किया। वे वेदांत और आध्यात्मिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और ज्ञान के प्रसार में अग्रणी हैं।
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