पूर्व व्यवस्था में समस्याएं
अब तक यूपी में आउटसोर्सिंग कर्मियों की भर्ती मुख्यत: साक्षात्कार के माध्यम से होती थी। इस प्रक्रिया में कई बार मनमानी की शिकायतें सामने आती थीं, जहां चयनकर्ताओं पर आरोप लगते थे कि वे अपनी पसंद के व्यक्तियों को चयनित कर लेते थे। खासकर यह आरोप थे कि चहेते और परिचितों को तरजीह दी जाती थी, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते थे। इस व्यवस्था के कारण गरीब, आर्थिक रूप से पिछड़े और ग्रामीण इलाकों के उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाते थे।
नई नीति में क्या बदलाव?
1 .योग्यता: अब उम्मीदवार की शिक्षा और अनुभव को सबसे महत्वपूर्ण मानक माना जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि योग्य व्यक्ति ही भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।
2 .पारिवारिक आय: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जिनके पास संसाधन नहीं हैं, उन्हें भी समान अवसर मिल सके।
3 .निवास स्थान: ग्रामीण इलाकों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और वहाँ के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे।
4 .विशेष प्राथमिकताएँ: तलाकशुदा और विधवाओं को भी इस प्रक्रिया में विशेष वरीयता दी जाएगी, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को रोजगार में समान अवसर मिल सके।

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