सुखोई-30MKI के लिए स्वदेशी इंजन
भारत ने अब तक सुखोई-30MKI विमान के लिए इंजन की आपूर्ति रूस से की थी, लेकिन अब HAL के कोरापुट डिवीजन में इन इंजन का स्वदेशी निर्माण शुरू हो गया है। रक्षा मंत्रालय और HAL के बीच हुए 21,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत लगभग 230 इंजन बनाए जाएंगे। यह सौदा भारत की रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है।
AL-31FP इंजन को भारतीय तकनीकी टीम द्वारा संशोधित किया गया है, ताकि यह भारतीय वायुसेना की विशेष आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इंजन का अपग्रेडेशन भी किया जाएगा, जिससे सुखोई-30MKI विमानों की कार्यक्षमता और भी बढ़ जाएगी। भारतीय वायुसेना इस अपग्रेडेशन को अगले कुछ वर्षों में पूरा करने की योजना बना रही है।
तेजस के लिए स्वदेशी इंजन
वहीं, भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। फिलहाल, तेजस के लिए इंजन की आपूर्ति अमेरिकी कंपनी GE द्वारा की जाती है। हालांकि, भारतीय रक्षा मंत्रालय अब तेजस के लिए भी स्वदेशी इंजन विकसित करने की योजना बना रहा है।
भारतीय वायुसेना की योजना है कि आने वाले समय में तेजस के लिए पूरी तरह से स्वदेशी इंजन का निर्माण किया जाए। इसके लिए भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और HAL मिलकर काम कर रहे हैं। स्वदेशी इंजन के निर्माण से भारत को न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल होगी, बल्कि यह देश की तकनीकी क्षमता को भी मजबूती देगा।
आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम
भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में यह दोनों कदम काफी महत्वपूर्ण हैं। सुखोई-30MKI और तेजस जैसे विमान देश की रक्षा ताकत को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर भारत अपने विमानों के लिए स्वदेशी इंजन बनाने में सफल हो जाता है, तो यह न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक नई पहचान भी स्थापित करेगा।
इसके अलावा, स्वदेशी इंजन के निर्माण से भारतीय रक्षा क्षेत्र को नई तकनीकी क्षमताएं प्राप्त होंगी, जो कि भविष्य में भारत को न केवल अपने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने में मदद करेंगी, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों के साथ रक्षा साझेदारी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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