चीन का कृषि क्षेत्र: तकनीकी सुधार और वृद्धि
चीन का कृषि क्षेत्र निरंतर विकास की ओर बढ़ रहा है। 2024 में चीन का कुल अनाज उत्पादन 7065 लाख टन दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 695.41 मिलियन टन के मुकाबले बढ़ोतरी को दर्शाता है। कृषि मंत्री के अनुसार, इस वृद्धि का मुख्य कारण उच्च गुणवत्ता वाले बीज, कृषि निवेश में वृद्धि और उन्नत तकनीकी प्रणालियों का प्रयोग है। चीन में धान उत्पादन 2075 लाख टन के आसपास रहा, जबकि गेहूं उत्पादन में 2.6% की बढ़ोतरी के साथ 1401 लाख टन गेहूं उत्पादित हुआ। मक्का उत्पादन 2949.2 लाख टन था।
चीन का कृषि उत्पादन वैश्विक स्तर पर एक अहम स्थान रखता है, लेकिन वह खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर नहीं है। चीन अपनी खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है। उदाहरण के तौर पर, चीन चावल, मक्का और सोयाबीन के लिए बड़े पैमाने पर आयात करता है। इसके अलावा, चीन की कुल कृषि भूमि का लगभग एक तिहाई हिस्सा ही उपजाऊ है, और शहरीकरण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के कारण कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।
भारत का खाद्यान्न उत्पादन: आत्मनिर्भरता की ओर
भारत भी वैश्विक कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, हालांकि चीन की तुलना में भारत का कुल अनाज उत्पादन कम है। 2023-24 के अनुमान के अनुसार, भारत का कुल अनाज उत्पादन लगभग 3288.52 लाख मीट्रिक टन हो सकता है। इसमें से धान का उत्पादन 1367 लाख मीट्रिक टन, गेहूं 1129.25 लाख मीट्रिक टन और मक्का 356.73 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है। भारत का गेहूं उत्पादन चीन से काफी नजदीक है, लेकिन अन्य फसलों में चीन भारत से कहीं आगे है।
भारत अपनी घरेलू खाद्यान्न खपत का बड़ा हिस्सा खुद उत्पादन करता है, जो इसे कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाता है। 2023 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश था, जबकि चीन इस मामले में 5वें स्थान पर था। भारत के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह कृषि के क्षेत्र में न केवल अपनी खपत को पूरा करता है, बल्कि दुनिया भर में खाद्यान्न निर्यात भी करता है।
यहाँ एक विस्तृत विवरण दिया गया है:
जौ: भारत जौ उत्पादन में चीन से आगे है.
कपास: भारत कपास उत्पादन में चीन से आगे है.
चावल: चावल के उत्पादन में चीन भारत से आगे है.
गेहूं: गेहूं के उत्पादन में चीन भारत से आगे है.
मक्का: मक्का के उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका चीन से आगे है, जबकि भारत चीन से पीछे है.

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