एक स्टॉल पर कुसुम बाला ने पहाड़ की दाल और अनाज का प्रचार किया, जिसका दावा है कि इनका सेवन हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह जानकारी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देती है। इसके अलावा, भांग के बीज, जो कैनाबिस सैटिवा पौधे से प्राप्त होते हैं, अत्यधिक पौष्टिक माने जाते हैं और इनका इस्तेमाल भी लोगों के बीच प्रचारित किया जा रहा है।
इस मेला में आकर्षण का एक और केंद्र है भदोही की कालीन और मध्य प्रदेश से आईं साड़ियां। यहां 50 प्रतिशत की छूट पर कालीन और साड़ियां उपलब्ध हैं। कालीन की कीमत 400 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक है, जबकि साड़ियां 200 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं।
इस प्रकार, उत्तरायणी मेला न केवल सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्पादों का अद्भुत संग्रह प्रस्तुत करता है, बल्कि यह शॉपिंग के लिहाज से भी एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, मेले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे लोग इस योजना के बारे में जान सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं। यह मेला न केवल व्यापार और संस्कृति का उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का भी माध्यम बन रहा है।
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