इसके अलावा, केबल भूमिगत करने और शहर के विभिन्न हिस्सों में सुंदरीकरण कार्य भी किए जाएंगे। इस कार्य के लिए 1110 करोड़ रुपये की लागत तय की गई है। यह कार्य स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी किया जा रहा है, जिसमें शहर की बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया जा रहा है। इन कार्यों के माध्यम से वाराणसी में बिजली व्यवस्था और भी स्मार्ट हो जाएगी।
15 नए 33 केवी विद्युत उपकेंद्र बनेंगे
वाराणसी जोन प्रथम के मुख्य अभियंता संदीप बंसल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना के तहत जिले में 15 नए 33 केवी विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन उपकेंद्रों के बनने से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में सुधार होगा और साथ ही विद्युत वितरण की क्षमता भी बढ़ेगी। इससे उपभोक्ताओं को अधिक समय तक निर्बाध बिजली आपूर्ति प्राप्त होगी।
भूमिगत केबल और सुंदरीकरण कार्य
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा केबल को भूमिगत करना है। वर्तमान में अधिकतर बिजली के तार खुले में होते हैं, जिससे बारिश और तूफान के दौरान विद्युत आपूर्ति में समस्या उत्पन्न हो जाती है। भूमिगत केबलिंग से यह समस्या कम हो जाएगी और शहर की सुंदरता में भी वृद्धि होगी। साथ ही, सुंदरीकरण कार्य के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली के बक्सों, पोल्स, और अन्य उपकरणों को नए तरीके से सजाया जाएगा, ताकि यह शहर के सौंदर्य को बिगाड़े नहीं।
1110 करोड़ रुपये की लागत से होगा निर्माण
इस परियोजना की कुल लागत लगभग 1110 करोड़ रुपये रखी गई है। परियोजना का उद्देश्य बिजली वितरण प्रणाली को सुधारना और पूरे जिले में विश्वस्तरीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इन कार्यों के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं, और एनओआइ (लेटर आफ इंडेंट) जारी होने के बाद कार्यदायी संस्था को कार्य शुरू करने के लिए पत्र जारी किया जाएगा। इस परियोजना को मंजूरी देने का बड़ा फैसला पिछले माह पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने लिया था।
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