इन रिक्त पदों में प्रवक्ता के 431 और सहायक अध्यापक के 409 पद, प्रधानाचार्य के 3 और उप प्रधानाचार्य के 4 पद, लाइब्रेरियन के 97, वरिष्ठ सहायक के 58, कनिष्ठ सहायक के 149, छात्रवास सहायक के 61, फार्मासिस्ट और नर्स के 37 पद, पत्रवाहक या माली के 194, मेस हेल्पर के 194 और चौकीदार सह स्वीपर के 194 पद खाली हैं।
बता दें की इन रिक्त पदों के कारण इन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आश्रम पद्धति के स्कूलों की शुरुआत 60 के दशक में प्रतिभावान एवं निर्धन छात्रों को उत्कृष्ट नि:शुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।
लेकिन, अब इन स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मियों के पद खाली होने के कारण एक शिक्षक पर कई पाठ्यक्रमों को पूरा कराने की जिम्मेदारी आ गई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। शैक्षिक संस्थानों से लगातार मिल रही शिकायतों और मनुहारों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने का निर्णय लिया है।

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