यूपी में जमीन की नई खतौनी में 4 बड़े बदलाव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब नई खतौनी में नाम के साथ-साथ हिस्से का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इसके लिए शासन ने एक नई सुधार प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया के तहत, ज़मीन के मालिकों का अंश (हिस्सा) पहले से निर्धारित किया जाएगा और फिर उसे खतौनी में दर्ज किया जाएगा। इस बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि खतौनी में केवल नाम ही नहीं, बल्कि संबंधित व्यक्ति का ज़मीन पर कितना हिस्सा है, यह भी स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा।

इस बदलाव से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें:

नामांतरण के बाद बदलाव: पहले जब कोई व्यक्ति ज़मीन खरीदता था और उसका नाम खतौनी में दर्ज करवाता था, तो उस व्यक्ति का नाम खतौनी के दाएं कालम में आदेश के रूप में दर्ज होता था। अब नामांतरण के बाद, सीधे मुख्य कालम में मालिक का नाम और उसकी ज़मीन का हिस्सा दर्ज किया जाएगा। इससे ज़मीन की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त की जा सकेगी।

पहले की प्रक्रिया: पहले ज़मीन के मालिक का नाम खतौनी में दर्ज करने के बाद, संबंधित व्यक्ति को छह साल तक इंतज़ार करना पड़ता था। यह इंतज़ार जमीन के बंटवारे और नामांतरण के दस्तावेजों के अपडेट होने के कारण था। अब इस प्रक्रिया को सरल और त्वरित किया जाएगा।

खतौनी का अद्यतन: अब यह ज़रूरी नहीं होगा कि हर छह साल में खतौनी को अपडेट किया जाए। अब, समय-समय पर ज़मीन का विवरण रियल टाइम में अपडेट होगा, ताकि ज़मीन से संबंधित किसी भी जानकारी को त्वरित तरीके से उपलब्ध कराया जा सके।

नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर का योगदान: शासन ने इस बदलाव के लिए नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) से सहयोग लिया है। NIC अब राजस्व परिषद के लिए एक सॉफ़्टवेयर विकसित कर रहा है, जो खतौनी के अद्यतन को रियल टाइम में संभव बनाएगा। इस सॉफ़्टवेयर के माध्यम से ज़मीन से जुड़ी सभी जानकारी को तुरंत अपडेट किया जा सकेगा, जिससे आम जनता को भी ज़मीन की स्थिति का त्वरित विवरण मिल सकेगा।

0 comments:

Post a Comment