राजस्व निरीक्षकों द्वारा की गई मांग के मुताबिक, उन्हें 1000 रुपये प्रतिमाह स्टेशनरी भत्ता दिया जाए, ताकि वे अपने कार्यों को ठीक से और बिना किसी आर्थिक दबाव के पूरा कर सकें। हालांकि, शासन द्वारा इस भत्ते को बढ़ाने के संबंध में 750 रुपये प्रति माह का प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि राजस्व निरीक्षकों ने मोटरसाइकिल भत्ता 2000 रुपये करने की मांग की थी, जिसे पहले ही शासन को भेजे गए प्रस्ताव में शामिल किया जा चुका है।
अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त, श्री अनिल कुमार यादव द्वारा शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया है कि एक राजस्व निरीक्षक के क्षेत्र में लगभग 40 से 50 गांव होते हैं। इन गांवों में विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, जमीन से संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग और संबंधित कागजी कार्यों के लिए लगातार खर्च आता है। विशेष रूप से, धारा-24 के ऑनलाइन आवेदनों के प्रिंट निकलवाने, धारा-38 के मामलों में नक्शा तैयार करने, और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए फोटो कापी की आवश्यकता होती है, जिसके लिए भारी खर्च होता है। इस खर्च को ध्यान में रखते हुए राजस्व निरीक्षकों ने स्टेशनरी भत्ता बढ़ाने की मांग की थी।
राजस्व निरीक्षक संघ के अध्यक्ष, श्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने भी एक ज्ञापन जारी कर यह बताया कि राजस्व निरीक्षकों को इन कार्यों के लिए लगातार स्टेशनरी का उपयोग करना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है। ऐसे में 6 रुपये का स्टेशनरी भत्ता इन सभी कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। इसलिए इसे बढ़ाये जाएं।
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