इस योजना के तहत, हर माह ग्राम पंचायतों से पॉलीथिन एकत्रित की जाती है और उसे एकत्र करके जिला पंचायत को बेचा जाता है। इससे जहां गांवों में सफाई और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।
कैसे चलता है अभियान?
यह अभियान हर महीने के दूसरे सप्ताह में चार दिन (सोमवार से गुरुवार) तक विशेष रूप से चलाया जाता है। इन चार दिनों में गांवों से सफाई कर्मचारियों द्वारा पॉलीथिन एकत्र की जाती है। पॉलीथिन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने के बाद, उसे कचरा निस्तारण केंद्र पर लाकर बेचने के लिए तैयार किया जाता है।
शुक्रवार और शनिवार को पॉलीथिन को केंद्र पर लाया जाता है, जहां उसे मशीनों से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद, उसे बोरों में भरकर जिला पंचायत को भेजा जाता है। जिला पंचायत इस पॉलीथिन का उपयोग सड़क निर्माण में करती है, जिससे सड़कें मजबूत और टिकाऊ बनती हैं।
ग्राम पंचायतों की आय में हो रहा इजाफा
इस अभियान से ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त आय हो रही है। पॉलीथिन के एकत्रीकरण से प्राप्त होने वाली आमदनी से ग्राम पंचायतें अपने विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धन जुटा रही हैं। यह पहल ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है और उन्हें अपनी आय बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रही है।
बुलंदशहर जिले की 946 ग्राम पंचायतों में यह अभियान चल रहा है और अब इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया है। पंचायत राज विभाग के डायरेक्टर ने इस योजना को प्रदेशभर में लागू करने का आदेश दिया है, जिससे पूरे उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन के निस्तारण और इसके पुनः उपयोग के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

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