मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बाईसकुर्लेशन के माध्यम से इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत, आवासीय और व्यवसायिक निर्माण के दौरान निरीक्षण पर होने वाले खर्च के एवज में भी परमिट शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क नक्शा पास करते समय वसूला जाएगा और इसे जनसुविधाओं के विकास में खर्च किया जाएगा।
आवास विभाग ने पहले इस शुल्क की वसूली के लिए शासनादेश जारी करते हुए विकास प्राधिकरणों को वसूली का निर्देश दिया था, लेकिन कुछ बिल्डरों ने इस पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रोक लगा दी थी और राज्य सरकार को आदेश दिया था कि इसके लिए नियमावली तैयार कर वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके बाद, आवास विभाग ने नियमावली तैयार की है।
उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 के तहत शुल्क निर्धारण, उद्धहरण और संग्रहण के लिए एक नई नियमावली को मंजूरी दी गई है। इस नियमावली के आधार पर, विकास प्राधिकरण शहरों में आवासीय और व्यवसायिक भवनों के निर्माण से होने वाले भार का आकलन करके शुल्क की वसूली करेगा। इस कदम से न केवल शहरों में जनसुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि शहरीकरण के बढ़ते दबाव को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

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